PAARAS PATHAR – BANKELAL COMICS -RC 162

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 पारस पत्थर #162: विशालगढ़ के राजा विक्रम सिंह प्रत्येक संध्या के समय गरीबों व बेसहारा लोगों के लिये अपने खजाने के स्वर्ण द्वार खोल देते थे। और उनकी देख रेख में प्रत्येक व्यक्ति को सेाना दान में दिया जाता। अब ये बात भला बांकेलाल से कैसे छुप सकती थी। आखिर राजा इतना सोना लाता कहां से है? शीघ्र ही उसे पता लगा उस पारस पत्थर का जिससे छुआने पर लोहा बदल जाता था सोने मे। बांकेलाल इतनी अनमोल वस्तु को कैसे छोड़ देता। वो पारस पत्थर ले भागा

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